Posted by: ajayjha on: July 2, 2009
खबर : पेट्रोल एवं डीजल महंगा हुआ :
नजर : आग लग गयी..आग लग गयी…ऐसे लिखो इस खबर को…..खाली महंगा होने ….लिख देने से कुछ नया नहीं है….हमें तो ऐसा लग रहा है की…राशन में ..टमाटर..आलू…के साथ एक और चीज महंगी हुई है….अच्छा तो ये था एजेंडा…१०० दिन का पहला तो पूरा हुआ भैया….अब ये और बता दो ..अगले सौ दिनों में ऐसे कितनी बार कहना पडेगा…..जय हो…जय हो…
.काले काले डीजल पेट्रोल के तले….
धीरे धीरे सरकार के ये फैसले….
अब जीवन की गाडी ये कैसे चले..
स्कूटर चले या की चूल्हा जले ..
जय हो…जय हो…एंड में ये बोलना जरूरी है ..नहीं तो ऑस्कर नहीं मिलेगा….
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खबर :- काम हैं तो मुद्दे भी खूब हैं हंगामे के लिए…संसद सत्र में
नजर : अच्छा …इस बार ऐसा है…मतलब थोड़े बहुत काम की भी गुंजाइश है..अरे छोडो यार…अब इतना भी बदलाव थोड़ी चाहा है जनता ने..तुम तो बहकने लगे…ये काम वाम की फालतू बातों छोडो….और जोरदार हंगामे की तैयारी करो…इस बार तो भैया…लिब्रहान आयोग..समलैंगिकता..और अब ये पेट्रोल डीजल…बस तीली जलाने की देर है…फिर तो..
लगा तो आग संसद में ..कार्यवाही इसे ही कहते हैं…..
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खबर : ममता चला सकती हैं असली गरीब रथ
नजर : अरे तो का लालू जी नकली वाला चला रहे थे…राम राम बताइये तो…मगर उमें लगा ऐसी तो बढियां ठंडा करता था…फिर ..चलिए मारिये गोली..ई बताइये असली वाला कौन सा होगा..का कहे……
माल गाडिया में ..चौकी…चटाई….खटिया ..बिछा के चलाया जाएगा..आ टिकट ..लौटरी का भी हो ..सिनेमा का भी हो तो चलेगा…
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खबर ; अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को भूला दिल्ली विश्व विद्यालय
नजर : लो विद्यालय हो या विश्व विद्यालय ..है तो इसी देश के..तो भला ..देश की परंपरा से अलग थोड़े हैं…और ये तो हमारे देश..हमारे समाज की पता नहीं कितनी पुरानी सभ्यता, संस्कृति और परम्परा है की जो भी हमारे देश का नाम रोशन करता है ..उसका नाम हम भूल जाते हैं और सिर्फ ऋतिक रोशन का याद रखते हैं….
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खबर : नतीजा दिखाए तो पाक से होगी बात
नजर : कित्ती बार तो उनके स्टुडेंट यहाँ पर आ कर …कैसे कैसे नतीजे दिखा चुके हैं…पिछली बार तो प्रिंसिपल साहब के कमरे तक (संसद में जी ) में जाकर नतीजा दिखाया था..अब क्या वे आपके लिए …अपने सबसे होनहार विद्यार्थियों..तालिबान को भेज दें…उन्हें अपने देश के लिए भी कुछ मेरिट बव्चा कर रखना है की नहीं…….
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खबर : बिजली पानी की हालत नहीं सुधरी तो आन्दोलन :खुराना
नजर : ल्लो कल्लो बात…अमा आन्दोलन में क्या कुएं..नेदियाँ ..खोदोगे…या की ….कोई पावर ग्रिड बनाओगे..नहीं ..क्या कहा सड़कों पर धरना प्रदर्शन करोगे…मतलब जो हालत बची होगी ..वो भी खराब कर दोगे ..सत्यानाश हो तुम्हारे आन्दोलन का ..बिजली-पाने न आये न सही…तुम मत आना ये आन्दोलन वान्दोलन ले के ….
July 2, 2009 at 12:25 pm
एकदम खरा…सौ टका !!!
देखिये का का होता है और आगे…एही बार में न कमाई कर लेना है पूरा ता बेचारे कैसे न करें यह सब…..
जनता मूड फुटौव्वल करेगी समलैंगिकता पर और इहाँ चुप्पे से उनके पैर के नीचे से थोड़ी सी जमीन खिसका लेंगे ये लोग….फ़ुट फुटाकर जब जनता घर जायेगी खाने ता बुझायेगा…जा ई का हो गया….ई ता देखबे नहीं किये…